KGMU Religion Conversion: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के कथित शोषण से जुड़े मामलों ने नया मोड़ ले लिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के कई डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने KGMU प्रशासन को संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट भी शासन को सौंपने को कहा गया है। STF की जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर कई वर्षों से धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें थीं। जांच एजेंसी ने पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और गांधी वार्ड समेत विभिन्न विभागों से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख किया है। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर संबंधित लोगों का पक्ष और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अपर मुख्य सचिव गृह ने KGMU प्रशासन को भेजा पत्र इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवम श्रीवास्तव ने STF मुख्यालय में की थी। उन्होंने KGMU परिसर में धर्मांतरण और कथित लव जिहाद से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग उठाई थी। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल के नेतृत्व में STF ने मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट के आधार पर अपर मुख्य सचिव (गृह) ने KGMU प्रशासन को पत्र भेजा है। इसमें KGMU अधिनियम 2002 और परिनियमावली 2011 के प्रावधानों के तहत चिन्हित डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। चार डॉक्टरों की भूमिका पर STF ने उठाए सवाल STF की रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के चार डॉक्टरों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और आरोपी डॉक्टर का पक्ष लिया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायत करने वाली महिला रेजिडेंट डॉक्टर को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताकर उसकी शिकायत को कमजोर करने की कोशिश की गई। STF ने इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की विभागीय जांच कराने की सिफारिश की है। गांधी वार्ड और माइक्रोबायोलॉजी विभाग भी जांच के दायरे में जांच रिपोर्ट में गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि महिला कर्मचारियों की शिकायतों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। कुछ मामलों में शिकायत करने वाली महिलाओं को ही परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं, माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत एक संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी समाप्त किए जाने के मामले को भी STF ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। दो अलग-अलग मामलों में दर्ज हैं मुकदमे STF की रिपोर्ट के मुताबिक, पैथोलॉजी विभाग की एक रेजिडेंट डॉक्टर ने 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में रमीज मलिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके अलावा, नर्सिंग स्टाफ की एक महिला कर्मचारी ने 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग थाने में रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में संबंधित थानों में मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस विवेचना कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, रमीज मलिक को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। 'इस्लामिक मेडिकोज' समूह से संपर्क में रहने का भी उल्लेख STF की रिपोर्ट में KGMU के चार डॉक्टरों और कर्मचारियों का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि ये लोग 'इस्लामिक मेडिकोज' नाम से सक्रिय मेडिकल छात्रों के एक समूह और उसके सदस्यों के संपर्क में थे। रिपोर्ट में इन लोगों को कथित घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद मामले को सामने न लाने का आरोप लगाया गया है। STF ने अपनी जांच के निष्कर्ष में रमीज मलिक के साथ-साथ उससे जुड़े बताए गए डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच एवं अन्य नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि KGMU की विशाखा कमेटी ने रमीज मलिक को संबंधित आरोपों में दोषी पाया था। ये भी पढ़ें: आजम खान की रिहाई पर फिर फंसा पेंच, 5 मुकदमों में मिले रिहाई परवाने, 52 मामलों ने बढ़ाया इंतजार